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Maharashtra Politics:महाराष्ट्र में विधायकों की अयोग्यता पर बड़ा फैसला- शिंदे गुट को स्पीकर ने असली शिवसेना माना

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को बड़ी राहत मिली है। 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर आज विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अपना फैसला सुना दिया है।

Maharashtra Politics: शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने फैसला सुनाते हुए शिंदे गुट को ही असली शिवसेना करार दिया। शिंदे गुट के 16 विधायकों की विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी। स्पीकर ने उन्हें योग्य ठहरा दिया है।  स्पीकर के इस फैसले पर एकनाथ शिंदे सरकार का भविष्य टिका था। जानकारी के मुताबिक स्पीकर राहुल नार्वेकर  ने 1200 पन्नों का एक जजमेंट तैयार किया था। आज का फैसला शिंदे गुट के पक्ष में आया है इससे उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 

शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यालय में जश्न

महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर द्वारा शिंदे गुट को असली शिव सेना बताए जाने के बाद मुंबई में शिवसेना-शिंदे गुट के दफ्तर में जश्न का माहौल। कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाइयां।

फैसला नियम और कानून के मुताबिक-रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, " महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने जो फैसला दिया है ये फैसला नियम और कानून के मुताबिक है। 2/3 बहुमत के माध्यम से एकनाथ शिंदे के पास 37 MLA हैं इसलिए चुनाव आयोग ने भी शिंदे की शिवसेना को असली गुट माना।.... उद्धव ठाकरे को बहुत झटका लगा है।"

शिवसेना का शिंदे गुट ही असली शिवसेना-स्पीकर

शिवसेना का शिंदे गुट ही असली शिवसेना है। शिंदे गुट को 37 विधायकों का समर्थन हासिल है। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, "21 जून 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी गुट बना तब शिंदे गुट ही असली शिवसेना राजनीतिक दल था।”

शिंदे को सस्पेंड करने की शक्ति उद्धव के पास नहीं-स्पीकर

'दोनो गुटों  की ओर से पार्टी का संविधान पेश किया गया वह अलग अलग है। चुनाव आयोग के पास 1999 का शिवसेना का संविधान है। और इसे ही हम मानेंगे। शिवसेना के असली संविधान में पक्ष प्रमुख का जिक्र नहीं। उद्धव ठाकरे किसी को पार्टी से नहीं निकाल सकते। शिंदे को सस्पेंड करने की शक्ति उद्धव के पास नहीं थी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही किसी को हटा सकती है।'

शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा-स्पीकर

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, "शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है...रिकॉर्ड के अनुसार,  मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है..."

ठाकरे गुट ने पार्टी संविधान में अवैध तरीक़े से बदलाव किए -स्पीकर

राहुल नार्वेकर ने कहा-दोनों गुट ने पार्टी के अलग-अलग कॉन्स्टिट्यूशन का हवाला दिया, उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दिया गया पार्टी के कॉन्स्टिट्यूशन पर तारीख नहीं थी, इसलिए वो मान्य नही किया गया। ठाकरे गुट ने पार्टी संविधान में अवैध तरीक़े से बदलाव किए वह अमान्य है। 2023 में शिंदे गुट ने कॉन्स्टिट्यूशन में सही बदलाव किए इसलिए उसी को मानेंगे। 2013 और 2018 में भी चुनाव नहीं हुए।

स्पीकर के फैसले की 10 बड़ी बातें

  • अपना फैसला सुनाते हुए स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार  मैंने वैध संविधान के रूप में शिवसेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है। शिवसेना के 2018 के संविधान पर विचार करने की उद्धव ठाकरे गुट की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती।
  •  राहुल नार्वेकर ने कहा कि मेरे विचार में 2018 नेतृत्व संरचना (ईसीआई के साथ प्रस्तुत) शिवसेना संविधान के अनुसार नहीं थी। पार्टी संविधान के अनुसार शिवसेना पार्टी प्रमुख किसी को भी पार्टी से नहीं हटा सकते हैं। इसलिए उद्धव ठाकरे ने पार्टी संविधान के अनुसार एकनाथ शिंदे या पार्टी के किसी भी नेता को पार्टी से हटा दिया। इसलिए जून 2022 में उद्धव ठाकरे द्वारा एकनाथ शिंदे को हटाना शिवसेना संविधान के आधार पर स्वीकार नहीं है।
  • महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि दोनों पार्टियों (शिवसेना के दो गुट) द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए संविधान पर कोई सहमति नहीं है। दोनों दलों के नेतृत्व संरचना पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। मुझे विवाद से पहले मौजूद नेतृत्व संरचना को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक संविधान तय करना होगा। शिवसेना का संविधान नेतृत्व संरचना की सीमा की पहचान को लेकर प्रासंगिक है। 
  •  चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में शिव सेना का संविधान वास्तविक संविधान है, जिसे शिवसेना का संविधान कहा जाएगा। याचिकाकर्ता (उद्धव गुट) के इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि 2018 के पार्टी संविधान पर निर्भर किया जाना चाहिए। 
  •  राहुल नार्वेकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट ने रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं रखी है या यहां तक ​​कि यह भी सुझाव नहीं दिया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कोई बैठक बुलाई गई थी जहां वास्तविक राजनीतिक दल के बारे में कोई निर्णय लिया गया था।
  • 2018 का नेतृत्व ढांचा शिवसेना के संविधान (1999 के जिस पर भरोसा किया जाता है) के अनुरूप नहीं था। इस नेतृत्व ढांचे को यह निर्धारित करने के लिए मानदंड के रूप में नहीं लिया जा सकता है कि कौन सा गुट वास्तविक शिव सेना है।
  • महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि 21 जून 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी गुट बना तब शिंदे गुट ही असली शिवसेना राजनीतिक दल था।  स्पीकर ने अपने फैसले में कहा कि विधानसभा में शिंदे गुट को शिवसेना के 55 में से 37 विधायकों का समर्थन था।
  • शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी धड़े द्वारा एक-दूसरे के विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला पढ़ते हुए नार्वेकर ने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सुनील प्रभु 21 जून, 2022 से सचेतक नहीं रहे। 
  • विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि शिवसेना के ‘प्रमुख’ के पास किसी भी नेता को पार्टी से हटाने की शक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सौंपा गया 1999 का पार्टी संविधान मुद्दों पर फैसला करने के लिए वैध संविधान था। उन्होंने कहा कि इस संविधान के अनुसार ‘राष्ट्रीय कार्यकारिणी’ सर्वोच्च निकाय है।
  • शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने फैसला सुनाते हुए शिंदे गुट को ही असली शिवसेना करार दिया। शिंदे गुट के 16 विधायकों की विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी। स्पीकर ने उन्हें योग्य ठहरा दिया है।  स्पीकर के इस फैसले पर एकनाथ शिंदे सरकार का भविष्य टिका था। जानकारी के मुताबिक स्पीकर राहुल नार्वेकर  ने 1200 पन्नों का एक जजमेंट तैयार किया था। आज का फैसला शिंदे गुट के पक्ष में आया है इससे उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
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